स्कूल में सोते दिखे प्रधानाध्यापक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल, 1994 से एक ही विद्यालय में पदस्थापित होने का ग्रामीणों का दावा
प्रधानाध्यापक बोले- आंख बंद हो गई थी, आगे रखेंगे ध्यान, बीडीओ ने कहा- किया जा रहा शो-कॉज
रिपोर्ट : राजेश कुमार रंजन , भागलपुर
सन्हौला (भागलपुर)। भागलपुर जिले के सन्हौला प्रखंड स्थित माधोपुर मध्य विद्यालय से जुड़ी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। वायरल तस्वीर में विद्यालय के प्रधानाध्यापक शिव कुमार ठाकुर आंखें बंद किए बैठे नजर आ रहे हैं। तस्वीर के सामने आने के बाद विद्यालय की व्यवस्था और प्रधानाध्यापक की कार्यशैली को लेकर ग्रामीणों के बीच चर्चा शुरू हो गई है।
मामले को लेकर प्रधानाध्यापक शिव कुमार ठाकुर से बात की गई तो उन्होंने अपनी गलती स्वीकार करते हुए कहा, “हमसे गलती हुई है। आइंदा इस तरह की गलती नहीं होगी।” उन्होंने कहा कि उनकी आंख बंद हो गई थी और आगे से वह इस बात का ध्यान रखेंगे। हालांकि, प्रधानाध्यापक ने यह भी स्पष्ट किया कि वह विद्यालय में सो नहीं रहे थे, बल्कि बैठे हुए थे। उनका कहना था कि “मैं स्कूल में सोता नहीं हूं, मैं बैठा हुआ हूं। मेरे बैठने का तरीका यही है।”
वायरल तस्वीर में उनकी आंखें बंद दिखाई दे रही हैं, जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है।
1994 से इसी स्कूल में होने की बात कही
प्रधानाध्यापक से जब पूछा गया कि वह मध्य विद्यालय माधोपुर में कितने समय से पदस्थापित हैं, तो उन्होंने बताया कि “मैं 1994 से इसी स्कूल में हूं।” उनके इस बयान के बाद एक ही विद्यालय में लंबे समय से पदस्थापन को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
वहीं, कुछ ग्रामीणों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर दावा किया कि शिव कुमार ठाकुर वर्ष 1994 से ही इसी विद्यालय में पदस्थापित हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इतने लंबे समय से एक ही विद्यालय में रहने के कारण विद्यालय की व्यवस्था पर उनकी पकड़ काफी मजबूत हो गई है। हालांकि, 1994 से लगातार इसी विद्यालय में पदस्थापित रहने के दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
बीडीओ बोले- मामले को दिखाता हूं, किया जा रहा शो-कॉज
वायरल तस्वीर के संबंध में सन्हौला के प्रखंड विकास पदाधिकारी कन्हैया कुमार से बात की गई। उन्होंने कहा, “मैं मामले को दिखाता हूं।” बीडीओ ने यह भी बताया कि मामले में प्रधानाध्यापक से शो-कॉज किया जा रहा है।
अब जांच के बाद विभाग की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है, इस पर लोगों की नजर है।
ग्रामीणों ने विद्यालय की व्यवस्था पर भी उठाए सवाल
कुछ ग्रामीणों ने विद्यालय की अन्य व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठाए हैं। नाम नहीं छापने की शर्त पर ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विद्यालय में बच्चों को सही तरीके से भोजन नहीं दिया जाता है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय की जिम्मेदारी संभालने वाले प्रधानाध्यापक यदि ड्यूटी के दौरान सोते हुए नजर आते हैं, तो इससे विद्यालय में पढ़ाई और अनुशासन की स्थिति को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
लंबे समय से एक ही विद्यालय में पदस्थापन पर सवाल
यदि प्रधानाध्यापक के वर्ष 1994 से इसी विद्यालय में पदस्थापित रहने का दावा सही पाया जाता है, तो इतने लंबे समय तक एक ही विद्यालय में पदस्थापन को लेकर शिक्षा विभाग की स्थानांतरण एवं पदस्थापन व्यवस्था पर भी सवाल उठ सकते हैं।
ग्रामीणों का सवाल है कि यदि प्रधानाध्यापक वास्तव में इतने वर्षों से इसी विद्यालय में पदस्थापित हैं, तो अब तक उनका तबादला या पदस्थापन में फेरबदल क्यों नहीं किया गया?
फिलहाल, वायरल तस्वीर के मामले में शो-कॉज की कार्रवाई की बात सामने आई है। अब जांच के बाद विभाग की ओर से क्या निर्णय लिया जाता है और लंबे समय से एक ही विद्यालय में पदस्थापन के दावे की क्या सच्चाई सामने आती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
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