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सुपौल : आस्था या अंधविश्वास?

Rajesh Kumar Ranjan / Mon, Apr 6, 2026 / Post views : 305

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आस्था या अंधविश्वास? सुनीता माता के दरबार में उमड़ रही भक्तों की भीड़, हर सोमवार-शुक्रवार जुटते हैं श्रद्धालु

बिहार के सुपौल जिले अंतर्गत सरायगढ़ भपटियाही प्रखंड के लालगंज, बगेवा ,टेंगराहा पंचायत के मझोआ वार्ड नंबर 1 में बीते 4 से 5 वर्षों से सुनीता माता का दरबार नियमित रूप से सज रहा है। खास बात यह है कि यह दरबार हर सोमवार और शुक्रवार को लगता है, जिसमें क्षेत्र ही नहीं बल्कि दूर-दराज से भी बड़ी संख्या में भक्त और श्रद्धालु अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं।

दरबार को लेकर स्थानीय लोगों के बीच गहरी आस्था देखने को मिल रही है। भक्तों का मानना है कि यहां विकलांगता, गूंगापन, संतान प्राप्ति में बाधा, भूत-प्रेत बाधा तथा घरेलू परेशानियों जैसी विभिन्न समस्याओं का समाधान होता है।

सुनीता माता का दावा है कि उनके शरीर में "संतो बाबा" का प्रवेश (प्रादुर्भाव) होता है, जिनकी कृपा से वे भक्तों की समस्याओं को समझकर उनका समाधान करती हैं। माता के अनुसार, यह सब उनकी भक्ति और साधना का परिणाम है, जिसके माध्यम से वे लोगों की सेवा कर रही हैं।

दरबार में आने वाले कई श्रद्धालु यह भी बताते हैं कि उनकी मनोकामनाएं यहां पूरी हुई हैं, जिसके बाद वे आस्था के साथ दोबारा यहां पहुंचते हैं। यही कारण है कि हर सोमवार और शुक्रवार को यहां भारी भीड़ देखने को मिलती है।

हालांकि, इस तरह के आयोजनों को लेकर समाज में अलग-अलग राय भी सामने आती है। कुछ लोग इसे अटूट आस्था का प्रतीक मानते हैं, तो कुछ इसे अंधविश्वास की श्रेणी में रखते हैं।

फिलहाल, यह दरबार क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है।

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