Rajesh Kumar Ranjan / Wed, Jul 22, 2026 / Post views : 65
पत्नी की मौत का सदमा नहीं सह पाया पति, अंतिम संस्कार की तैयारी के बीच तोड़ा दम; एक साथ उठीं दोनों की अर्थियां
खबर औरैया जिला उत्तरप्रदेश से
रिपोर्ट---
राजेश कुमार रंजन, संपादक सुपौल दस्तक अखबार
औरैया जिले के गांव मधवापुर में एक मार्मिक घटना ने पूरे क्षेत्र को गमगीन कर दिया। टीबी की बीमारी से पत्नी की मौत का सदमा पति बर्दाश्त नहीं कर सका और पत्नी की अंत्येष्टि की तैयारी के दौरान उसकी भी मौत हो गई।विवाह के समय साथ निभाने का लिया गया वचन इस घटना में मानो जीवन की अंतिम सीमा तक निभ गया। गांव में पति-पत्नी दोनों की अर्थी एक साथ उठी तो हर किसी की आंखें नम हो गईं। बाद में दोनों का एक साथ अंतिम संस्कार किया गया।
मधवापुर निवासी श्यामल दास (40) की पत्नी पिंकी (35) पिछले चार वर्षों से टीबी की बीमारी से पीड़ित थीं। उनका इलाज कानपुर के एक निजी अस्पताल में चल रहा था। सोमवार शाम अचानक उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। पति और ग्रामीण जब तक उन्हें अस्पताल ले जाते, उससे पहले ही उनकी मौत हो गई। पत्नी की मौत के बाद श्यामल दास पूरी रात उसके शव के पास बैठा रहा। वह कभी पिंकी का चेहरा देखता तो कभी उसका हाथ पकड़कर रोने लगता और कहता कि वह उसे अकेला छोड़कर कैसे जा सकती है, जबकि वह उसके बिना एक पल भी नहीं रहती थी।
मंगलवार सुबह पिंकी के अंतिम संस्कार की तैयारियां चल रही थीं। इसी दौरान जब पत्नी की मांग में अंतिम बार सिंदूर भरा जा रहा था, तभी श्यामल दास अचानक लड़खड़ाकर गिर पड़ा और उसकी भी मौत हो गई। पत्नी के बाद पति की मौत से परिवार और पूरे गांव में मातम छा गया।
ग्रामीणों ने बताया कि श्यामल दास अपनी पत्नी से बेहद प्रेम करता था और बीमारी के दौरान उसने उसकी पूरी निष्ठा से सेवा की थी। वह अक्सर कहा करता था कि यदि पिंकी को कुछ हो गया तो वह भी जीवित नहीं रह पाएगा। पत्नी की मौत के बाद वह पूरी रात बेसुध होकर रोता रहा। बाद में श्यामल दास के ससुर रामसनेही ने दोनों के अंतिम संस्कार की व्यवस्था कराई। ग्रामीणों ने पति-पत्नी की अर्थी एक साथ उठाई और नदी किनारे दोनों का एक साथ अंतिम संस्कार किया। श्यामल दास के चचेरे भाई सुनील ने दोनों को मुखाग्नि दी।
इस दर्दनाक घटना के बाद दंपती के दो बेटे देव (7) और दिव्यांशु (9) अनाथ हो गए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि श्यामल दास भूमिहीन था और पत्नी की बीमारी के कारण मजदूरी भी नहीं कर पा रहा था। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती गई। दंपती की दो बेटियां भी थीं, जिनकी कई वर्ष पहले मृत्यु हो चुकी थी। अब दोनों बेटों की जिम्मेदारी उनके नाना रामसनेही ने उठाने का फैसला किया है।
रामसनेही ने बताया कि उनकी बेटी की ससुराल औरैया जिले के मधवापुर गांव में थी, जबकि उनका गांव कन्नौज जिले के थाना ठठिया क्षेत्र का मलगवां है। उन्होंने बताया कि श्यामल दास के हिस्से में नदी किनारे केवल दो बीघा ऊबड़-खाबड़ जमीन थी, जिसमें खेती नहीं हो पाती थी। परिवार के भरण-पोषण के लिए वह मजदूरी करता था। कुछ समय तक वह परिवार के साथ तमिलनाडु में भी रहा, लेकिन करीब डेढ़ साल पहले पिंकी की तबीयत बिगड़ने पर पूरा परिवार वापस मधवापुर लौट आया था।
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