Sun, 26 Jul 2026
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दिल्ली : मोबाइल और माइक्रोफोन लेकर कोई भी पत्रकार नहीं बन सकता, डराने-धमकाने वाली पत्रकारिता पर जवाबदेही जरूरी : दिल्ली हाईकोर्ट

Rajesh Kumar Ranjan / Sat, Jul 18, 2026 / Post views : 59

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नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रेस की स्वतंत्रता को लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताते हुए कहा है कि इसकी आड़ में गैर-जिम्मेदार पत्रकारिता, डराने-धमकाने या सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित करने वाली सामग्री को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। अदालत ने कहा कि आज सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के दौर में मोबाइल फोन और माइक्रोफोन लेकर कोई भी स्वयं को रिपोर्टर घोषित कर देता है, जबकि कई मामलों में ऐसे लोगों के पास न तो पत्रकारिता का प्रशिक्षण होता है और न ही पेशेवर जवाबदेही।

हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि प्रेस की स्वतंत्रता का संरक्षण आवश्यक है, लेकिन यह गैर-जिम्मेदार पत्रकारिता या नागरिकों को डराने-धमकाने का माध्यम नहीं बन सकती। अदालत ने कहा कि स्वतंत्र प्रेस और जवाबदेही के बीच संतुलन बनाए रखना लोकतंत्र के हित में जरूरी है।

न्यायालय ने बढ़ते डिजिटल मीडिया परिदृश्य पर चिंता जताते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि विधायिका ऐसा उपयुक्त नियामक ढांचा तैयार करने पर विचार करे, जिससे प्रेस की आजादी सुरक्षित रहे और साथ ही पेशेवर जवाबदेही, नैतिक मानकों, कानून के शासन तथा नागरिकों के अधिकारों का भी संरक्षण सुनिश्चित हो सके।

दिल्ली हाईकोर्ट की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में स्वयंभू पत्रकार सक्रिय हैं। अदालत ने संकेत दिया कि पत्रकारिता के नाम पर अपुष्ट आरोपों, सनसनीखेज सामग्री और गैर-जिम्मेदार रिपोर्टिंग पर अंकुश लगाने के लिए प्रभावी व्यवस्था की आवश्यकता है।

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