सूबे में इन दिनों रील बनाकर जल्द से जल्द प्रसिद्धि या पैसा कमाने की आकांक्षा युवाओं के सिर चढ़कर बोल रहा है। टीआरपी बटोरने का साथ व्यूअर बढ़ाने के लिए वे किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ रहा कि वे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरपयोग कर रहे हैं। और इसके लिए उन्हें जेल भी हो सकती है। कुछ ऐसा ही मामला हरसिद्धि के पानापुर धनखरैया निवासी अभिषेक कुमार के साथ है, जो खुद को दिल्ली में यूपीएससी एस्पिरंट्स के रूप में प्रस्तुत करता है। उसे शनिवार की देर शाम पुलिस ने हिरासत में ले लिया। पिछले कई दिनों से वह गांव के ही एक विद्यालय में जाकर अमर्यादित, उदंड तरीके से बात करते हुए वीडियो बना रहा था। इसके माध्यम से शिक्षण कार्य मे बाधा पहुंचाने का काम कर रहा था। इतना ही नहीं, आरोप है कि उसने हरसिद्धि के प्रखंड विकास पदाधिकारी और अरेराज की ट्रेनी आईएएस सह अनुमंडल पदाधिकारी से भी आवेदन देने के दौरान दुर्व्यवहार किया। अभद्रता से उच्चे आवाज में बात की। उसने इसका वीडियो बनाकर अपने आईडी से वायरल किया। इसमें स्पष्ट दिख रहा है कि उसका 'बॉडी लैंगुएज' कैसा है। बताया जाता है कि प्रशानिक महकमे की शिकायत पर ही पुलिस ने उसे पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। गौरतलब है कि रातोंरात चर्चित होने के लिए उसने कुछ 'यूट्यूबरों' से सेटिंग भी की है। उसको उकसाने वाले ऐसे कथित यूट्यूबरों की कुंडली भी पुलिस खंगाल रही है। हिरासत में लेने के बाद पुलिस ने टीम ने उसकी सोशल मीडिया आईडी से उन वीडियो को डिलीट करवाया, जिसमें सरेआम पुलिस, प्रशासन को चुनौती देते हुए असंवैधानिक तरीके से पेश आ रहा है। इस बावत ग्रामीणों दबी जुबान में कहते हैं कि वह अधूरी पढ़ाई छोड़कर दिल्ली से आया है। सफलता नहीं मिलने के कारण कुछ-कुछ मानसिक रूप से परेशान भी है। उसके शैक्षणिक योग्यता की जांच की जाए। लाइमलाइट में आने के लिए वह अपनी पढ़ाई को लेकर मनगढ़त किस्से सुनाते रहता है। इस बावत बीडीओ गुलशन कुमार कहते हैं कि हर किसी को संवैधानिक तरीके से आवेदन देकर शिकायत करने का अधिकार है। लेकिन कानून हाथ में लेकर उदंडता करना, अभद्र रूप से पेश आना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरुपयोग है। इससे समाज में अराजकता फैलती है।
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