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मधेपुरा : पशुपालन से ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को मिलेगा नया आयाम : डीपीएम

Rajesh Kumar Ranjan / Sat, Jun 20, 2026 / Post views : 294

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जीविका के आदर्श शिक्षण एवं प्रशिक्षण केंद्र में पशुधन प्रबंधन विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न

ग्रामीण महिलाओं की आय में वृद्धि तथा आजीविका के सुदृढ़ीकरण में पशुपालन की महत्वपूर्ण भूमिका को ध्यान में रखते हुए जीविका के आदर्श शिक्षण एवं प्रशिक्षण केंद्र, मधेपुरा में 19 एवं 20 जून 2026 को पशुधन विषय पर दो दिवसीय गैर-आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। प्रशिक्षण में उदाकिशुनगंज, कुमारखंड, बिहारीगंज, मुरलीगंज, मधेपुरा सदर, गम्हरिया एवं सिंहेश्वर प्रखंडों की पशु-सखियों एवं जीविकोपार्जन विशेषज्ञों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम का उद्घाटन जिला परियोजना प्रबंधक (डीपीएम) श्री नील कमल चौधरी, कोशी दुग्ध संघ, सुपौल के प्रतिनिधि श्री ज्ञान भारती तथा पशु चिकित्सा पदाधिकारी श्री विकास रंजन ने संयुक्त रूप से किया। प्रशिक्षण का उद्देश्य पशु-सखियों एवं अन्य सामुदायिक कैडरों को डेयरी विकास, पशुधन प्रबंधन, पशु स्वास्थ्य, पोषण एवं आयवर्धन संबंधी तकनीकी जानकारियों से सशक्त बनाना था, ताकि वे समुदाय स्तर पर बेहतर मार्गदर्शन प्रदान कर सकें और ग्रामीण परिवारों की आजीविका गतिविधियों को नई गति मिल सके।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए जिला परियोजना प्रबंधक श्री नील कमल चौधरी ने कहा कि पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित पशु-सखियां गांवों में पशुधन आधारित आजीविका को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी, जिससे जीविका से जुड़ी दीदियों की आय में वृद्धि होगी तथा वे आत्मनिर्भरता की दिशा में और अधिक सशक्त बन सकेंगी।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को वैज्ञानिक पशुपालन, डेयरी प्रबंधन, पशु रोगों की रोकथाम, टीकाकरण, संतुलित आहार एवं पशुधन आधारित उद्यमिता के विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।

इस अवसर पर प्रबंधक (पशुधन) श्री उत्तम कुमार, जीविकोपार्जन विशेषज्ञ श्री नीरज कुमार, श्री भोला कुमार, श्री रजत कुमार सहित अन्य पदाधिकारी एवं प्रशिक्षक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के सफल आयोजन पर प्रतिभागियों ने इसे अत्यंत उपयोगी बताते हुए प्राप्त ज्ञान को समुदाय तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

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