मक्का खरीद में करोड़ों की धोखाधड़ी मामला: पुलिस की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल, पीड़ितों ने DIG से की SIT जांच की मांग
सुपौल दस्तक न्यूज,सहरसा
परी ट्रेडर्स के संचालक पर सैकड़ों किसानों व छोटे व्यापारियों की गाढ़ी कमाई हड़पने का आरोप
पीड़ितों का दावा पुलिस ने नहीं की कार्रवाई, किसानों ने खुद आरोपी को दबोचकर पुलिस को सौंपा था
जांच में लापरवाही, केस डायरी में लीपापोती और रिमांड न लेने पर डीआईजी को सौंपा 28 बिंदुओं का शिकायती पत्र
सौर बाजार (सहरसा): थाना क्षेत्र में सैकड़ों किसानों और छोटे व्यापारियों से मक्का खरीद के नाम पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। मामले में स्थानीय पुलिस की कार्यशैली, संदिग्ध भूमिका और जांच में घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए दर्जनों पीड़ित किसानों और व्यापारियों ने कोसी प्रक्षेत्र के पुलिस उप-महानिरीक्षक को एक विस्तृत प्रतिवेदन सौंपा है। पीड़ितों ने स्थानीय थाना पुलिस से जांच हटाकर किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की निगरानी में विशेष जांच दल गठित करने और समयबद्ध निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
दिए गए आवेदन के अनुसार, सौर बाजार स्थित 'परी ट्रेडर्स' के संचालक आशुतोष गुप्ता उर्फ वैष्णवी, उसके भाई अमितोष गुप्ता उर्फ बिट्टू गुप्ता और गोपाल प्रसाद गुप्ता ने किसानों व स्थानीय छोटे व्यापारियों से करोड़ों रुपये की मक्का व कृषि उपज खरीदी।
इसके बाद वे बिना भुगतान किए रातों-रात पूरे परिवार सहित फरार हो गए। काफी दौड़-धूप और वरीय अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद सौर बाजार थाने में कांड संख्या 155/26 और 159/26 दर्ज तो की गई, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई।
किसानों ने खुद महेशखूंट से दबोचा था आरोपी...!
पीड़ितों का कहना है कि जब पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही, तब किसानों ने खुद अपने स्तर से लगातार सुराग जुटाकर मुख्य आरोपी आशुतोष गुप्ता को महेशखूंट से पकड़ा और वरीय पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर स्थानीय पुलिस के हवाले किया। हैरत की बात यह है कि आरोपी को पकड़ने का श्रेय भी स्थानीय पुलिस खुद लेने लगी, जबकि पीड़ितों को डराया-धमकाया गया।
जांच में लीपापोती और 28 गंभीर सवाल...!
पीड़ित किसानों व व्यापारियों ने डीआईजी को सौंपे ज्ञापन में पुलिसिया जांच पर 28 गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
रिमांड व पूछताछ नहीं: मुख्य आरोपी के पकड़े जाने के बाद भी पुलिस ने उसे पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ क्यों नहीं की?
मोबाइल फॉरेंसिक जांच गायब: आरोपी के पास से बरामद सैमसंग स्मार्टफोन और 4 सिम कार्डों की फॉरेंसिक/सीडीआर जांच क्यों नहीं कराई गई?
गुजरात की मिल में फंसा पैसा: गुजरात की एक मिल में आरोपी का 1 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया लेनदेन था, जिसकी जानकारी देने के बावजूद पुलिस ने भुगतान रोकने या खाते फ्रीज करने की ठोस पहल क्यों नहीं की?
साक्ष्य मिटाने की छूट: आरोपी के घर से सामान हटाने और सीसीटीवी फुटेज को जब्त न कर साक्ष्य नष्ट होने देने का आरोप है।
पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की अनदेखी: आरोपी पर वर्ष 2010 में सरकारी धोखाधड़ी का पुराना मामला दर्ज था, जिसे वर्तमान केस डायरी में नजरअंदाज किया गया।
अन्य आरोपी अब भी खुलेआम घूम रहे: मामले के नामजद अन्य आरोपी अमितोष गुप्ता, गोपाल गुप्ता और शरण देने वाले सहयोगी अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।
"साक्ष्य जुटाएं हम और जेल जाने का डर भी हमें!"
पीड़ितों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि वे बीते कई महीनों से थाने और अधिकारियों के चक्कर काटकर परेशान हैं। जब वे अपनी मेहनत की कमाई वापस पाने के लिए सबूत जुटाते हैं, तो उल्टा पुलिस द्वारा उन्हें ही कानूनी कार्रवाई की धमकी दी जाती है।
उच्चाधिकारियों से लगाई गुहार...!
पीड़ित किसानों—जिनमें मुख्य रूप से दिनेश कुमार गुप्ता, रूपेश कुमार, मनोज कुमार, श्याम कुमार, सिंटू कुमार, चंदन साह, नवल कुमार, नीरज कुमार, अजय साह, लक्ष्मण यादव व अन्य शामिल हैं—ने इस ज्ञापन की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, डीजीपी और एडीजी को भी प्रेषित की है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उच्चस्तरीय एसआईटी का गठन कर निष्पक्ष जांच नहीं की गई, तो वे सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
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